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Monday, 15 March 2021

Sundar Pichai Google CEO [ Pichai Sundarajan] - Biography

  


भारतीय मूल के सुंदर पिचाई को गूगल का नया सीईओ बनाया गया है। सुंदर पिचाई अब तक कंपनी  में सीनियर वाइस प्रेसीडेंट थे। चेन्नई में 1972 में जन्मे सुंदर पिचाई का मूल नाम पिचाई सुंदराजन  है, लेकिन उन्हें सुंदर पिचाई के नाम से जाना जाता है।

सुंदर पिचाई ने अपनी बैचलर डिग्री आईआईटी, खड़गपुर से ली है। उन्होंने अपने बैच में सिल्वर मेडल हासिल किया था।  अमेरिका में सुंदर ने एमएस की पढ़ाई स्टैनडफोर्ड यूनिवर्सिटी से की और वॉर्टन यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। पिचाई को पेन्सिलवानिया यूनिवर्सिटी में साइबेल स्कॉलर के नाम से जाना जाता था। 



सुंदर पिचाई ने 2004 में गूगल ज्वाइन किया था। उस समय वे प्रोडक्ट और  इनोवेशन ऑफिसर थे। सुंदर सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (एंड्रॉइड, क्रोम और ऐप्स डिविजन) रह चुके हैं। पिछले साल अक्टूबर में उन्हें गूगल का सीनियर वीपी (प्रोडक्ट चीफ) बनाया गया था। एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम के डेवलपमेंट और 2008 में लांच हुए गूगल क्रोम में उनकी बड़ी  भूमिका रही है। 

आर्थिक तंगी में सुंदर पिचाई 1995 में स्टैनफोर्ड में बतौर पेइंग गेस्ट रहते थे। पैसे बचाने के लिए उन्होंने पुरानी चीजें इस्तेमाल कीं, लेकिन पढ़ाई से समझौता नहीं किया। वे पीएचडी करना चाहते थे लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें बतौर प्रोडक्ट मैनेजर अप्लायड मटीरियल्स इंक में नौकरी करनी पड़ी। प्रसिद्ध कंपनी मैक्किंसे में बतौर कंसल्टेंट काम करने तक भी उनकी कोई पहचान नहीं थी।



1 अप्रैल 2004 को वे गूगल में आए। सुंदर का पहला प्रोजेक्ट प्रोडक्ट मैनेजमेंट और इनोवेशन शाखा में गूगल के सर्च टूलबार को बेहतर बनाकर दूसरे ब्रॉउजर के ट्रैफिक को गूगल पर लाना था। इसी दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि गूगल को अपना ब्राउजर लांच करना चाहिए। 

 

इसी एक आइडिया से वे गूगल के संस्थापक लैरी पेज की नजरों में आ गए। इसी आइडिया से उन्हें असली पहचान मिलनी शुरू हुई। 2008 से लेकर 2013 के दौरान सुंदर पिचाई के नेतृत्व में क्रोम ऑपरेटिंग सिस्टम की सफल लांचिंग हुई और उसके बाद एंड्रॉइड मार्केट प्लेस से उनका नाम दुनियाभर में हो गया।



सुंदर ने ही गूगल ड्राइव, जीमेल ऐप और गूगल वीडियो कोडेक बनाए हैं। सुंदर द्वारा बनाए गए क्रोम ओएस और एंड्रॉइड एप ने उन्हें गूगल के शीर्ष पर पहुंचा दिया। पिछले साल एंड्रॉइड डिविजन उनके पास आया और उन्होंने गूगल के अन्य व्यवसाय को आगे बढ़ाने में भी अपना योगदान दिया। पिचाई की वजह से ही गूगल ने सैमसंग को साझेदार बनाया। 

प्रोडक्ट मैनेजर के रूप में जब सुंदर ने गूगल ज्वाइन किया था, तो इंटरनेट यूजर्स के लिए रिसर्च किया, ताकि यूजर्स जो इन्स्टॉल करना चाहते हैं, वे जल्दी इन्स्टॉल हो जाए। हालांकि यह काम ज्यादा मजेदार नहीं था, फिर भी उन्होंने खुद को साबित करने के लिए अन्य कंपनियों से बेहतर संबंध बनाएं, ताकि टूलबार को बेहतर बनाया जाए। उन्हें प्रोडक्ट मैनेजमेंट का डायरेक्टर बना दिया गया।  2011 में जब लैरी पेज गूगल के सीईओ बने, तो उन्होंने तुरंत पिचाई को प्रमोट करते हुए सीनियर वाइस प्रेसीडेंट बना दिया गया था।

                 

BBK ELECTRONICS - DUAN YONGPING

 

 BBK ELECTRONICS - Duan Yongping



यहां पर मैं बताऊंगा इस कंपनी के शुरुआत से लेकर अभी तक के सफर के बारे में| वैसे मैं आपको बता दूं| कि यह कंपनी Kafi Famous Smartphone Brands ki Parent Company है| जैसे वन प्लस स्मार्टफोन, ओप्पो स्माटफोन, वीवो स्मार्टफोन, रियल मी स्मार्टफोन, IQOO स्मार्टफोन| अब आपको Pata लग गया होगा| कि इतने सारे Famous Smartphone Brands इस कंपनी के ही है| यह कंपनी काफी सारी स्मार्टफोन Brands को दुनिया भर में Sell Karti है| और काफी ज्यादा प्रॉफिट Earn Karti है



About BBK Electronics

बीबीके इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन, चाइना की एक बहुत ही बड़ी कंपनी है| यह इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट बनाने का एक बहुत ही बड़ा MNC ग्रुप है| जोकि टेलीविजन सेट से लेकर MP3 प्लेयर, Digital कैमरा और स्मार्टफोन बनाती है| इस कंपनी को 22 साल हो चुके हैं, यह कंपनी 1998 में स्टार्ट हुई थी| इसके मालिक का नाम है Duan Yongping और इस कंपनी का हेड क्वार्टर डाउनलोड चाइना में है| पूरे वर्ल्ड में यह कंपनी अपने प्रोडक्ट काफी सारे Famous ब्रांड्स नेम के अंतर्गत Sell Karti Hai.



BiG Electronic Products Manufacture

आइए जानते हैं, इस कंपनी के सफर के बारे में| इस कंपनी का स्मार्टफोन के अलावा भी काफी सारे कैटेगरी में प्रोडक्ट आते हैं| जैसे कि Blueray प्लेयर्स इस कंपनी के काफी ज्यादा फेमस है| हेडफोन, हेडफोन एंपलीफायर, स्मार्ट वॉच यह सभी चीजें ओप्पो Digital Company के अंतर्गत बेची जाती है| यह कंपनी चाइना की बहुत ही बड़ी कंपनी है| जो कि सबसे ज्यादा टैक्स Pay करती है, चाइनीस गवर्नमेंट को| अभी तक कंपनी ने 57 मिलियन स्मार्टफोन बेचे है| यह कंपनी स्मार्टफोन बेचने में सेकंड नंबर पर आती है All Over World, Huawei और एप्पल के बाद| तीसरे नंबर पर आती है सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स|

अब आप समझ गए होंगे कि इंडिया में बिकने वाले इतने सारे जो Famous स्मार्टफोन Brands Hai. उन सब के पीछे एक ही कंपनी है BBK Electronics China. तो आज के बाद जब भी आप, किसी से बात करें तो आपको पता होना चाहिए| कि रियल मी, ओप्पो, वीवो & वनप्लस एक ही कंपनी के Smartphone ब्रांड्स है|

UDUPI RAMACHANDRA RAO - BIOGRAPHY

 

उडिपी रामचंद्र राव (कन्नड: ಉಡುಪಿ ರಾಮಚಂದ್ರ ರಾವ್, जन्म:१० मार्च १९३२, निधन: २४ जुलाई २०१७) भारत के एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक तथा भारतीय उपग्रह कार्यक्रम के वास्तुकार थे। उन्होने भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास तथा प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में संचार एवं सुदूर संवेदन के विस्तृत अनुप्रयोग के लिये मौलिक योगदान दिया है। वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के भूतपूर्व अध्यक्ष थे। उनके नेतृत्व में ही वर्ष १९७५ में भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया था। वे भारत के प्रथम अंतरिक्ष वैज्ञानिक थे जिन्हें वर्ष २०१३ में ‘सैटेलाइट हाल ऑफ द फेम’ में तथा वर्ष २०१६ में ‘आईएएफ हाल ऑफ फेम’ में सम्मिलित किया गया था। निधन से पूर्व वे तिरुवनंतपुरम में स्थित भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान के कुलपति के रूप में कार्यरत थे। उनको भारत सरकार द्वारा सन १९७६ में विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण से तथा वर्ष २०१७ में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।



कर्नाटक में उडुपी जिले के अडामारू क्षेत्र में जन्मे राव इसरो के सभी अभियानों में किसी न किसी तरह शामिल थे। १९६० में अपने कैरियर की शुरुआत के बाद से भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास में खासकर संचार और प्राकृतिक संसाधनों के सुदूर संवेदन के व्यापक उपयोगों में योगदान दिया है। वे इसरो उपग्रह केंद्र के प्रथम निदेशक थे। १९७६ से १९८४ तक केन्द्र के निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल में, वे देश में उपग्रह प्रौद्योगिकी के विकास में अग्रणी पथ प्रदर्शक रहे। उन्होने १९७२ में भारत में उपग्रह प्रौद्योगिकी की स्थापना के लिये ज़िम्मेदारी ली। उनके मार्गदर्शन में, १९७५ में प्रथम भारतीय उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ संचार, सुदूर संवेदन तथा मौसम विज्ञान सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए १८ से भी ज़्यादा उपग्रहों की अभिकल्पना एवं प्रमोचित की गई। १९८४ में अध्यक्ष, अंतरिक्ष आयोग एवं सचिव, अंतरिक्ष विभाग के रूप में कार्यभार संभालने के उपरांत, उन्होने रॉकेट प्रौद्योगिकी के विकास को आगे बढ़ाया। परिणामस्वरुप ए.एस.एल.वी. रॉकेट तथा प्रचालनात्मक पी.एस.एल.वी. प्रमोचन यान जो ध्रुवीय कक्षा में २.०टन श्रेणी के उपग्रहों को प्रमोचित कर सकता है का प्रमोचन सफलता पूर्वक किया गया। उन्होने १९९१ में भू-स्थिर प्रमोचन यान जी.एस.एल.वी. के विकास एवं निम्नतापीय (क्रायोजेनिक) प्रौद्योगिकी के विकास की शुरूआत की। निधन से पूर्व वे अहमदाबाद के भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के शांसकीय परिषद के अध्यक्ष थे। एम.आई.टी. में संकाय सदस्य के रूप में कार्य करने के उपरांत डल्लास के टेक्सास विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर रहे जहाँ उन्होंने कई अग्रणी तथा अन्वेषक अंतरिक्षयानों पर प्रमुख प्रयोगकर्ता के रूप में अन्वेषण किए, वे १९६६ में भारत वापस लौटे और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद के प्रोफेसर बने। 


उन्होने कॉस्मिक किरणें
, अंतरग्रहीय भौतिकी, उच्च ऊर्जा खगोलिकी, अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं उपग्रह तथा रॉकेट प्रौद्योगिकी विषयों पर ३५० से भी अधिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी लेख प्रकाशित किए हैं और कई किताबें लिखी हैं। वे २१ से भी अधिक विश्वविद्यालयों से डी.एस.सी. (मानद डाक्टरेट्) के भी प्राप्त कर्ता है, जिनमें यूरोप का सबसे पुराना विश्वविद्यालय, बोलोगना विश्वविद्यालय भी शामिल है। 

Source by - https://en.wikipedia.org